The Taj Story”: परेश रावल की दमदार वापसी, ताजमहल के रहस्यों पर बनी एक अनोखी फिल्म

🎬 The Taj Story: परेश रावल की नई फिल्म — ताजमहल के रहस्यों पर एक गहरी नजर

🎬 The Taj Story: परेश रावल की दमदार वापसी — ताजमहल के रहस्यों पर बनी एक अनोखी फिल्म

By News247ind • 30 अक्टूबर, 2025 • फ़िल्म समीक्षा
The Taj Story - Poster

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता परेश रावल एक बार फिर बड़े पर्दे पर एक अनोखी कहानी लेकर आ रहे हैं। उनकी नई फिल्म “The Taj Story” ने रिलीज़ से पहले ही दर्शकों और मीडिया का ध्यान खींच लिया है—ट्रेलर, पोस्टर और संगीत ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम फिल्म के हर पहलू — कहानी, कास्ट, विवाद, तकनीकी पक्ष और दर्शक‑प्रतिक्रिया — को जाँचते हैं।

परिचय

परेश रावल अपने शानदार अभिनय और दमदार संवादों के लिए हमेशा याद किए जाते हैं। उनकी हर फिल्म में कुछ नया देखने को मिलता है — चाहे वह कॉमेडी हो, ड्रामा या फिर गंभीर किरदार। अब वे एक ऐसी फिल्म लेकर आ रहे हैं जो सिर्फ कहानी नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक रहस्य को उजागर करती है। फिल्म का नाम है “The Taj Story”, जो ताजमहल जैसे विश्वविख्यात स्मारक की कहानी को एक नए नजरिए से पेश करती है।

फिल्म की पृष्ठभूमि: ताजमहल – प्रेम या रहस्य का प्रतीक?

ताजमहल को अब तक प्रेम का प्रतीक माना गया है — शाहजहाँ और मुमताज की मोहब्बत का निशान। लेकिन “The Taj Story” इस सोच को एक नए एंगल से देखने की कोशिश करती है। फिल्म यह सवाल उठाती है — “क्या ताजमहल सिर्फ एक मकबरा है, या इसके पीछे कोई और कहानी छिपी है?”

डायरेक्टर ने इस फिल्म में इतिहास, राजनीति और भावनाओं का शानदार मिश्रण दिखाया है। कहानी 17वीं सदी के दौर में शुरू होती है, जब ताजमहल का निर्माण हो रहा था। इसी दौरान कुछ ऐसे किरदार सामने आते हैं जो इस इमारत से जुड़ी सच्चाई को खोजने की कोशिश करते हैं।

परेश रावल का किरदार

परेश रावल इस फिल्म में आचार्य देवदत्त नामक एक विद्वान इतिहासकार का रोल निभा रहे हैं। उनका किरदार गहराई और रहस्य से भरा है — वे ऐसे व्यक्ति हैं जो ताजमहल के निर्माण के पीछे की छिपी सच्चाइयों को उजागर करना चाहते हैं। उनके संवाद फिल्म की जान हैं।

एक डायलॉग जो पहले ही वायरल हो चुका है — “इतिहास सिर्फ पत्थरों में नहीं लिखा जाता, उसे समझने के लिए दिल चाहिए।” यह किरदार परेश रावल के अब तक के करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण रोल्स में से एक माना जा रहा है।

कहानी का सार

फिल्म की कहानी दो टाइमलाइन में चलती है — एक ओर 1600 का मुग़ल काल, और दूसरी ओर आज का भारत। वर्तमान दौर में एक इतिहासकार (परेश रावल) एक पुरानी डायरी पाते हैं जिसमें ताजमहल से जुड़ी कुछ रहस्यमयी जानकारियाँ होती हैं। वह इसकी तह तक जाने निकलते हैं और धीरे-धीरे इतिहास के पन्नों से परदा उठता है।

मध्यकालीन भाग में शाहजहाँ, मुमताज और उस समय की राजनीति को बारीकी से दिखाया गया है। फिल्म यह भी दिखाती है कि कैसे सत्ता, धर्म और कला के बीच संघर्ष ने ताजमहल के निर्माण को प्रभावित किया।

सेट डिजाइन और विजुअल्स

फिल्म के सेट्स अद्भुत हैं। ताजमहल के अंदरूनी हिस्सों को CGI और रियल सेट्स के कॉम्बिनेशन से तैयार किया गया है। डायरेक्टर ने ऐतिहासिक प्रामाणिकता का खास ध्यान रखा है — कपड़े, वास्तुकला, और भाषा तक को उस युग के अनुरूप रखा गया है।

विजुअल्स इतने भव्य हैं कि दर्शक खुद को उस दौर में महसूस करते हैं। ताजमहल के शॉट्स को अंतरराष्ट्रीय सिनेमैटोग्राफर मार्क हॉलैंड ने शूट किया है, जिन्होंने पहले “The Crown” जैसी सीरीज़ में काम किया है।

संगीत और भावनाएँ

फिल्म का संगीत भी इसके आत्मा की तरह है। A.R. रहमान के निर्देशन में तैयार हुआ बैकग्राउंड स्कोर ताजमहल की पवित्रता और रहस्य दोनों को एक साथ पेश करता है। गानों में “तू है अमर प्रेम मेरा” और “पत्थरों में लिखी दास्तान” जैसे ट्रैक्स पहले ही ट्रेंड कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

फिल्म का ट्रेलर रिलीज होते ही YouTube पर पहले 24 घंटे में 30 मिलियन से ज़्यादा व्यूज़ मिले। लोगों ने परेश रावल की एक्टिंग की जमकर तारीफ की। Twitter (अब X) पर #TheTajStory ट्रेंड करता रहा।

एक यूज़र ने लिखा — “परेश रावल का हर डायलॉग इतिहास के दिल को छू जाता है।”

डायरेक्टर की सोच

फिल्म के निर्देशक राजेश मिश्रा ने बताया — “हमने कोई मिथ या विवाद नहीं दिखाया, हमने केवल वो कहा जो इतिहास के पन्नों में अनकहा रह गया था।” उन्होंने यह भी कहा कि यह फिल्म किसी विवाद को जन्म देने के लिए नहीं, बल्कि इतिहास को भावनात्मक नज़रिए से समझाने के लिए बनाई गई है।

विवाद और सेंसर बोर्ड

फिल्म को लेकर कुछ विवाद भी उठे हैं। कुछ इतिहासकारों का कहना है कि फिल्म कुछ घटनाओं को काल्पनिक रूप में दिखाती है। हालाँकि सेंसर बोर्ड ने इसे “UA” सर्टिफिकेट देते हुए कहा कि यह एक “फिक्शनल-हिस्टोरिकल ड्रामा” है, न कि डॉक्यूमेंट्री।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान

“The Taj Story” सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि विदेशों में भी चर्चा का विषय बन गई है। फिल्म को कान्स फिल्म फेस्टिवल और टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रीमियर के लिए चयनित किया गया है। अंतरराष्ट्रीय समीक्षक इसे “India’s answer to The Da Vinci Code” कह रहे हैं।

अभिनय और सह कलाकार

परेश रावल के साथ फिल्म में तब्बू, अर्जुन रामपाल और नवाजुद्दीन सिद्दीकी भी नज़र आएंगे। तब्बू एक पुरातत्व विशेषज्ञ के किरदार में हैं, जो इतिहास और भावनाओं के बीच झूलती नज़र आती हैं। नवाजुद्दीन एक रहस्यमयी पत्रकार का किरदार निभा रहे हैं जो कहानी को आधुनिक एंगल देता है।

दर्शकों के लिए संदेश

फिल्म का मुख्य संदेश है — “इतिहास को समझने के लिए हमें सिर्फ पढ़ना नहीं, महसूस करना होगा।” यह फिल्म दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है — क्या हम अपने इतिहास को सच में जानते हैं, या बस सुनी-सुनाई बातों पर भरोसा करते हैं?

निष्कर्ष

“The Taj Story” एक ऐसी फिल्म है जो सिर्फ देखी नहीं जाती, महसूस की जाती है। यह इतिहास, कला और भावना का संगम है। परेश रावल का दमदार अभिनय, बेहतरीन निर्देशन और शानदार संगीत इसे एक क्लासिक सिनेमा अनुभव बनाता है।

रिलीज़ डेट और उम्मीदें

फिल्म 15 नवंबर 2025 को भारत के सभी सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। ट्रेड एनालिस्ट्स का मानना है कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ₹200 करोड़ तक कमा सकती है, और ऑस्कर 2026 में भारत की एंट्री के रूप में भी जा सकती है।

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